अनायास मुख से निकलने वाले इस अभियक्ति ने, हमारे साथ बड़े हो रहे सभी लोगों के अंदर स्वाभाविक रूप से जगह बना ली, किसी भी विशेष परिस्थिति में - विस्मय, प्रसन्नता, विषमता या वेदना के लिए, व्यक्त या अव्यक्त रूप से, स्वतः अंदर से उभर कर - "भक बे" - हलक तक आ ही जाता है!